महाराजगंज थाने में जब्त वाहन चढ़ रही जंग की भेंट

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सीवान: महाराजगंज यहां चिराग तले अंधेरा है. अनुमडंल के विभिन्न थाने में विभिन्न मामले में जब्त किये गये वाहन थाने के अंदर और बाहर जंग की भेंट चढ़ रहे हैं. राज्य में लागू शराबबंदी अधिनियम के बाद थानों में जब्त वाहन की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है.कई थाने तो ऐसे हैं जहां इन वाहनों को रखने की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में इन्हें बीना शेड़ के रखना मजबूरी है. जाहिर है कि ऐसे वाहन पूरी तरह असुरक्षित होते है. सैकड़ों ऐसे वाहन हैं जो वाहन मालिक के इंतजार में अब कबाड़ के लायक भी नहीं रह गया है. लावारिस वाहनों को एक निश्चित समय सीमा के बाद नीलाम करने का प्रावधान रहा है. लेकिन नीलामी नहीं होने की वजह से कई थाना कबाड़खाने में तब्दील हो चुका है. कुछ लोग तो न्यायालय के आदेश से अपना वाहन वापस ले जाते है, लेकिन बेनामी और लावारिस वाहन जंग खाने के लिए खड़े रह जाते हैं. महाराजगंज थाने में विगत कई वर्षों से थाना परिसर में जब्त वाहनों की संख्या सर्वाधिक हो गयी है. दर्जनों वाहन ऐसे हैं जो 10 से 20 वर्षो से थाना परिसर में रखी हुई है. वहीं कई ऐसे वाहन हैं, जिसके चारों ओर पेड़ उग आए है और झाड़ियों के कब्जे में है. इस मामले में थानेदारों का स्पष्ट कहना है कि जब्त वाहनों के मालिक अगर कोर्ट से रिलीज ऑर्डर लेकर आते हैं तो इन वाहनों को मालिक के हवाले कर दिया जाता है. शराब मामले में जब्त कई वाहन को हाईकोर्ट के आदेश पर छोड़ दिया जाता है. जिन वाहनों के मामले में लोगों के पास कागजात नहीं होते है, उसके मालिक गाड़ी वापसी की कोशिश भी नहीं करते है. महाराजगंज एवं दारौंदा थाना में वर्षो से जब्त पड़े वाहन अब किसी काम के नहीं है. विभिन्न थाना परिसर में जब्त वाहनों को रखने की अब जगह भी नहीं बची है. वहीं थाना के बाहर लगे वाहनों से बैटरी और अन्य ऐसेसीरिज की चोरी भी आम बात है. निश्चित समय के बाद लावारिस वाहन भी नहीं हुए नीलाम, कबाड़ में तब्दील क्या हैं नीलामी के नियम नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन के छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है. वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है. बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है. न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपका कर या समाचार पत्रों के माध्यम से उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने का प्रावधान है, ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके.लेकिन जटिल प्रक्रिया होने की वजह से कोई भी थानाध्यक्ष नीलामी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता है.

प्रावधान तो है, नहीं होती नीलामी

महाराजगंज अनुमंडल क्षेत्र के छह थाना दारौंदा, महाराजगंज, बसंतपुर, भगवानपुर, गौरियाकोठी एवं जामो थाना परिसर में सौकड़ों दोपहिया एवं चारपहिया वाहन वर्षों से सड़ रहे है. जिनमें से कुछ गाड़ियों पर तो झाड़-पात भी उग आये हैं. अकेले महाराजगंज थाना में पांच से अधिक चारपहिया वाहन और दर्जनों मोटरसाइकिल जंग की भेंट चढ़ रहे है. थाना में मौजूद पुलिस पदाधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए सभी वाहन विभिन्न कांडों में संलिप्त पाये गये लोगों की हैं. उन्होंने बताया कि जब्त सभी गाड़ियों को कोर्ट से आदेश लेकर आने के बाद छोड़ा जाता है. कुछ गाड़ियों के बहुत दिन हो जाने के बाद भी जब लोग उन्हें लेने नहीं आते हैं तो ऐसे गाड़ियों को थाना परिसर में ही कोर्ट के आदेशानुसार नीलाम करने का प्रावधान है.बताया कि लंबे अरसे से वाहनों की नीलामी नहीं हुई है. जब आदेश आयेगा तो मौजूद सभी वाहनों की नीलामी की कर दी जायेगी.

लाखों की गाड़ियां हुई कबाड़

अनुमंडल के विभिन्न थाना मे लावारिस अवस्था में बरामद व अलग-अलग कांडों में जब्त की गयी सैकड़ों गाड़ियां उचित रखरखाव एवं नीलामी नहीं होने के कारण सड़ रही है. इन गाड़ियों की कीमत कभी लाखों में रही होगी, आज स्थिति यह है कि यह कवाड़ में भी बड़ी मुश्किल से ही बिक पाएगी. थाना में जब्त सभी वाहन खुले में रखे हुए रहते हैं. जो बारिश व धूप में खराब हो रहे हैं. हरेक थाने में 20 से 25 बाइक व दो से तीन चारपहिया व बड़े वाहन सालों से खड़े-खड़े कबाड़ बन चुके हैं. कई बड़े वाहनों के ढांचे भी अब सड़ने के कगार पर पहुंच चुका हैं. वहीं खड़े वाहनों से कीमती पार्टस की चोरी आम बात है. जानकार बताते हैं कि वर्षो से खड़े वाहनों की नीलामी थानाध्यक्ष को ही करवानी है, जो कोर्ट के माध्यम से होगा लेकिन इन सभी मामलों में अधिकारियों की दिलचस्पी नहीं होती है.
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शराब मामले में दर्जनों वाहन हुई जब्ती

महाराजगंज अनुमडंल के विभिन्न थाना क्षेत्र में शराबके मामले में तीन दर्जन से अधिक गाड़ियों को जब्त किया गया है. जिसमे स्कार्पियो, बोलेरो, कार, पिकअप ट्रक सभी तरह की गाड़ियां शामिल है. इसके अलावा शराब समेत अन्य कई मामले में 100 से अधिक बाईक भी थाना परिसर में जंग की भेंट चढ़ रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

जब्त वाहनों का सीजर बनाकर मालखाना में इंट्री होती है. सभी जब्त वाहन सुरक्षित रहते हैं. थाना परिसर में रखे जब्त वाहनों को नीलाम करने की एक कानूनी प्रक्रिया है. जब्त वाहन केस से संबंधित रहते हैं. न्यायालय में केस खुलने पर जब्त वाहनों को प्रदर्शन किया जाता है. केस फाइनल होने के बाद ही जब्त वाहनों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.इसको लेकर नीलामी प्रक्रिया के लिए सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया गया है.

हरेश शर्मा

एसडीपीओ,महाराजगंज

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