उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कोठिया-नरांव में उमड़ा भक्तों व दर्शनार्थियों को जनसैलाब

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रिपोर्ट: चंद्र प्रकाश राज

छपरा: लोक आस्था के पावन पर्व छठ के अवसर पर सारण जिला के गड़खा प्रखंड स्थित कोठिया-नरांव सूर्य मन्दिर पर आस्था का जनसैलाब देखने को मिला। अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए दो बजे दिन से ही लोग जुटने लगे। सूर्य मन्दिर परिसर व जल कुण्ड के घाटों पर छठ व्रतियो का अद्भुत नजारा देखा जा रहा था।जो देखते ही बनता था। रंग-बिरंगे परिधान में भक्तो का जन सैलाब मनोरम दृश्य पैदा कर रहा था। व्रतियों ने तीन बजे से अर्घ्य अर्पित करना शुरू कर दिया जो शाम तक जारी रहा। अर्घ्य अर्पित कर व्रतियो ने मन्नते रखी।
इसके बाद भगवान सूर्य के मन्दिर मे जाकर दर्शन कर पूजा अर्चना कि और बाद मे कथा श्रवण कर घर लौटी। दूर दराज से आये छठ व्रती अपने नीजी वाहन से लौट गये। वही जिनके संबन्धि कोठिया-नरांव के थे।

वे अपने संबन्धियो के यहां रात्री विश्राम किये। वही लगभग एक दर्जन माताओ ने रात्री मे घाट पर ही सेवन किया और सुबह उदयांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर घर लौटे। घाट पर रहने वाले माताओं मेअनीता देवी, शिवकुमारी देवी व सुरसातो देवी तो खरना के दिन ही छठ घाट पर खरना का प्रसाद बनाकर खरना कि व अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए प्रसाद बनाकर अर्घ्य अर्पित की। उनलोगों ने बताया की हमलोगों
को संतान नही थी, संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी हुई तो यहा व्रत कर रही हूं। पांच वर्ष लगातार मन्दिर पर व्रत करने का मन्नत है।

उदयान्चल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए प्रातः ढाई बजे से ही व्रतियो का तांता लगने लगा।पहले उनलोगों ने कोशी भरा एवम इसके बाद ब्रम्ह मूहुर्त में ही उदयांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घंटो तक जलकुण्ड मे व्रती भक्तो की भीड देखी गई ।अर्घ्य अर्पित कर सब ने भगवान सूर्य का पूजा अर्चन किया व सप्तऋषि सन्त महात्मा के प्रतिमा का पूजन किया व मन्दिर के प्रधान पूजेरी 108 श्री मनोहर दास जी महाराज से आशीर्वाद ग्रहण कर दक्षिणा व प्रसाद भेंट कर कथा श्रवण कर घर लौटे। छठपूजा के मौके पर सूर्य मन्दिर सेवा समिति के सेवक व प्रबंधन समिति के सदस्य हर तरह की सुविधाओ को मुहैया कराने को लेकर तत्पर रहे। निःशुल्क अंग्रेज़ी व होमियो पैथिक शिविर भी लगाया गया था।

इसके अलावे सेवा समिति के सदस्यो के तरफ से दूर-दराज से आये व्रतियों के परिजनो व श्रधालु भक्तो के लिए शसस्त्र सुरक्षा कर्मियों व संत महात्माओ के लिए भोजन की भी व्यवस्था किया गया था। लगभग आधा दर्जन संत बेगुसराय,रांची आदि स्थलो से भगवान सूर्य का दर्शन करने व सूर्य मन्दिर का छठ देखने आये थे। कुछ संतो ने भी व्रत किया था, जिनमे फतेहा के पूजेरी रामेश्वर दास जी महाराज प्रमुख थे।

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