बदलते जमाने के साथ त्योहारों का बदल रहा रंग 

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सीवान। बदलते जमाने के साथ अब त्योहार मनाने का रंग भी बदल रहा है। एक समय था जब होली के रंग में सराबोर होकर लोग नगाड़े की धुन पर ठुमके लगाया करते थे। लेकिन बदलते जमाने के साथ लोगों में काफी बदलाव आई है। जो लोग संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते थे। वे आज के समय में डीजे की धुन पर थिरकने को मजबूर है। कारण स्पष्ट है “बदलते जमाने के साथ त्योहारों के बदलते रंग” यह हम नहीं कह रहे हैं यह पूरा भारत के लोग कह रहें हैं कि भारत में अन्य त्योहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हालांकि यहां मस्ती के मुड़ में लोग यह भूल जाते हैं कि वे अच्छाई करने जा रहे हैं या बुराई। बीते समयों में होली वाले दिन लोग घर-घर जाकर अपने से बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए अच्छाई के साथ बुराई को खत्म करने की प्रतिज्ञा लेते थे। लेकिन अब यह परंपरा थोड़ी दूरी में पहुंच कर सिमट चुकी है। ऐसे तो हम सभी को जानकारी है की होली मस्ती मिलन और उमंग का त्यौहार माना जाता है। इस दिन सभी मस्ती के मुड में होते है। गांव में होली पर अक्सर लोग भांग-ठंडाई पीते है पर अब यह ठंडाई नशेबाजी बन गई है। लोग नशे में आकर चौक-चौराहों पर हुड़दंग मचाते है जिस वहज से कई लोग घर से बाहर निकलना पसंद नहीं करते। पहले के समय में लोग घर पर ही गुलाल बनाकर होली खेला करते थे। बदलते समय के साथ रासायनिक रंगों ने होली पर कब्जा कर लिया। पर डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्य परामर्शो के रासायनिक रंगों का चहरे व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताने के बाद लोग खुद ही धीरे-धीरे रासायनिक रंग से दूर होते चले गयें है.

इनपुट: प्रियांशु कुमार सिंह