सीवान के पूर्व सांसद और बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन का शव सोमवार को सुपुर्दे-खाक कर दिया गया।

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दिल्ली. के आईटीओ बेरुन दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के शव को सोमवार सुपुर्दे-खाक किया गया।तीन दिन पहले पूर्व सांसद की दिल्ली के अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई थी। शहाबुद्दीन को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीवान के पूर्व बाहुबली सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के शव को बिहार लाने की सारे उम्मीदें खत्म होने के बाद पूर्व सांसद के शव को दिल्ली में सुपुर्दे खाक किया गया। शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली से सीवान लाने के लिए परिजनों ने एक याचिका हाईकोर्ट में दायिर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व सांसद के शव को दिल्ली के कब्रिस्तान में दफनाने का फैसला लिया गया था।

शहाबुद्दीन के निधन की न्यायिक जांच हो :

जीतन राम मांझी ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के निधन की न्यायिक जांच और उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने को कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसका आग्रह किया है। मांझी ने सोमवार ट्वीट कर यह आग्रह किया।

शहाबुद्दीन के समर्थकों का फूटा आक्रोश

दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में शहाबुद्दीन का शव लेने को लेकर कुछ समय तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। सीवान के अलावा दिल्ली व अन्य जगहों के समर्थक अस्पताल में जुट गए थे। इस दौरान अस्पताल में काफी संख्या में पुलिसबल की तैनाती कर दी गई। सूत्रों के अनुसार समर्थक इस बात से काफी नाराज थे कि शहाबुद्दीन के शव को परिजनों के हवाले नहीं किया जा रहा है। समर्थकों का कहना था कि यह शव किसी आम आदमी का नहीं है, बल्कि चार बार सांसद रहे शहाबुद्दीन का है। समर्थक पुलिस को वर्दी की धौंस नहीं दिखाने की बात कह रहे थे। आक्रोशित समर्थक केन्द्र व राज्य सरकार के साथ ही जेल व अस्पताल प्रशासन पर शहाबुद्दीन की हत्या करने का आरोप लगा रहे थे।

मौलाना एम आरिफ कासमी ने जनाजे की नमाज पढ़ाई।

मौलाना एम आरिफ कासमी ने जनाजे की नमाज पढ़ाई। लकड़ी के बॉक्स में कफन में लपेट कर शव को दफन किया गया। इस दौरान माहौल पूरी तरह से गमगीन था। शव को सुपुर्दे खाक के लिए एम्बुलेंस से जदीद कब्रिस्तान लाया गया था। प्रशासन द्वारा 20 लोगों को ही सुपुर्दे खाक में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। पिता के शव को मिट्टी देने के लिए इकलौते पुत्र ओसामा शहाब व परिवार के कुछ सदस्यों के अलावा सीवान के धनंजय कुशवाहा, बबलू अंसारी, फरीद खान, साबिर मुखिया, बशर अली खान, फकरुद्दीन अहमद, अकील अहमद राही, हाजी एहसानुलक,एनामुल्लाह, अदनान, लालबाबू,रब्बानी व ओखला विधायक अमानतुल्लाह, इमरान प्रतापगढ़ी,समस्तीपुर के शेरु खान आदि थे.

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