सांख्यिकी स्वयंसेवक का अब तक नहीं हुआ उधार,सीएम साहब की चरणों में प्रणाम

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पटना। राज्य के हजारों सांख्यिकी स्वयंसेवक अभी भी रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे है. हालांकि ये ऐसे ही नौकरी के लिए भटकने को मजबूर नहीं है इनके साथ यह लोग सांख्यिकी कर्मी परीक्षा लेने के उपरांत प्रशिक्षित कर बहाल किये गए है.हालांकि इतने वर्षों के बाद अभी तक इनको रोजगार प्राप्त नहीं हुई है.कई सांख्यिकी स्वयंसेवक अपने दुखड़े सुनाते-सुनाते थक चुके है हालांकि इनका सुनने वाला कोई नहीं है.इधर कई सांख्यिकी कर्मियों की मानें तो उनका कहना है कि वे कई वर्षों से बेरोजगारी का दंश झेल रहे है.क्योंकि इन बेरोजगारों से उनका रोजगार कथित सुशासन की सरकार ने छीन लिया है.

बता रहे हैं कि जो कार्य पहले सांख्यिकी स्वयंसेवक करते थे उस कार्य को अब शिक्षक,किसान सलाहकार इत्यादि कर्मी करने लगे है.जो कि इस कार्य के बदले किसान सलाहकार और शिक्षकों को अलग से इसकी भुगतान की जाती है. बताया गया कि किसान सलाहकारों और शिक्षकों पर पहले से ही इससे ज्यादा काम का माथा पेची है. हालांकि अब तो शिक्षक हड़ताल पर भी चले गए है. ऐसे में अब दोनों तरफ का गुणवत्ता प्रभावित हो रहा है हालांकि बिहार सरकार इन सब मसले में अपना टांग अड़ाना नहीं चाहती. चाहे बेरोजगार भूखे पेट मरने को तैयार हो। पिछले 7 वर्षों से परीक्षा में सफल होकर अपनी नौकरी का इंतजार कर रहे. सांख्यिकी स्वयंसेवकों ने सरकार से अभी भी काउंसलिंग कराकर उन्हें रोजगार देने की बात कही है.

सांख्यिकी स्वयंसेवकों की संख्या ज्यादा होने के कारण नहीं मिली थी रोजगार

स्वयंसेवकों की माने तो उन्हें उनकी संख्या ज्यादा होने के कारण बिहार सरकार ने रोजगार देने से वंचित कर दिया था हालांकि वह पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण हो चुके हैं. 2013 से लेकर 2020 तक रोजगार की आंख में भटक रहे कई स्वयंसेवकों ने अपनी रोजगार के लिए बाहर कई जगहों पर नौकरी करना शुरू कर दी है जिसकी वजह से अब स्वयं सेवकों की संख्या थोड़ी ही बची है. स्वयंसेवकों की मानें तो सरकार अभी से भी उनकी काउंसिलिंग करना शुरू कर देती तो उन्हें रोजगार की प्राप्ति हो जाती.

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