सीवान: स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में डीसीएचसी सह आइसोलेशन वार्ड में ऑक्सीजन की घोर किल्लत,100 बेड पर मात्र 20 ऑक्सीजन?

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महाराजगंज में हैं जिले का एकमात्र कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बना डीसीएचसी सह आइसोलेशन वार्ड

महाराजगंज: सरकार भले लाख दावे कर ले कि बिहार में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए पूर्ण व्यवस्था की जा रही है,लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर की किल्लत है तो कहीं चिकित्सकों की किल्लत अब ऐसे में संक्रमित मरीजों का इलाज करें तो कौन करें। ताजा मामला बिहार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे जी के गृह जिला सीवान के महाराजगंज का है,यहां जिले के एकमात्र कोरोना मरीजों के इलाज के लिए डीसीएचसी सह आइसोलेशन वार्ड भी बना दी गई,लेकिन चिकित्सकों के उत्तम प्रबंध ना होने की वजह से प्रत्येक दिन संक्रमित मरीजों की मौत हो रही है,गौरतलब हो कि यहां से अब तक चार संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है, यहां आइसोलेशन वार्ड में 100 बेड के बीच मात्र 20 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है,जहां वर्तमान में 16 कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज चल रहा है,ऐसे में अगर गंभीर अवस्था में संक्रमित को भर्ती कराया जाता है और ऑक्सीजन की किल्लत होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?.

कैसे मिलेगा कोरोना से ग्रसित मरीजों को जीवनदान?.

महाराजगंज मुख्यालय के 100 बेड अनुमंडलीय अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए डेडीकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर बनाया गया हैं। यहां जिले के विभिन्न प्रखंडों से कोरोना संक्रमित मरीज रेफर होकर इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन मरीजों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। डॉक्टर,स्टाफ,नर्स,वार्ड बॉय एवं ऑक्सीजन सिलेंडर की घोर अभाव हैं।

मरीजों की बढ़ती संख्या को देख लगाया जा रहा है अतिरिक्त बेड

महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए 70 बेड का डेडीकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर बनाया गया हैं। यहां कोरोना से पीड़ित व्यक्तियों को जीवनदान मिल सकती हैं। हालांकि चिकित्सक और ऑक्सीजन सिलेंडर की घोर अभाव के बीच इसकी कल्पना भी नहीं कि जा सकती है, क्षण प्रतिक्षण मरीजों की बढ़ती संख्या को देखकर अस्पताल प्रबंधक बेड की संख्या में बढ़ोतरी कर रही हैं। अब अस्पताल में 70 बेड की जगह 100 हो गई है। हर बेड के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था रहनी चाहिए। लेकिन यहां कुछ और ही चल रहा हैं। कुल 100 बेड पर मात्र 20 ऑक्सीजन सिलेंडर ही उपलब्ध हैं।

अस्पताल में मरीजों को सांस देने वाली ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी।

कोरोना मरीजों को जीवनदान देने वाली अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की घोर कमी हैं। ऐसे में संक्रमित मरीजों की इलाज कैसे संभव हो पाएगा। आपको बताते चलें कि अस्पताल के पास कुल 100 बेड पर केवल 20 ऑक्सीजन सिलेंडर ही उपलब्ध हैं। 16 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है.अब कयास यह लगायें जा रहे हैं कि कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई तो यहां की स्थिति अत्याधिक भयावह हो सकती हैं।

ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफलिंग करने वाले रो-रहे रोना।

अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफलिंग करने वाले अब रोना-रो रहे हैं। जानकारी यह है कि रिफलिंग करने वाला कभी भी ऑक्सीजन सिलेंडर में रिफलिंग करना बंद कर सकता हैं। डर यही है कि इलाज के लिए भर्ती कोरोना मरीजों की सांसे कभी भी थम सकती है.

अस्पताल में भर्ती मरीजों की नहीं हो रही है देखभाल

कोरोना से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए उत्तम प्रबंध नहीं हैं। यहां मरीजों के देखभाल के लिए शिफ्ट वाइज डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ की आवश्यकता है। जानकारी के लिए बताते चले कि 8 घंटे के शिफ्ट में कम से कम 2 डॉक्टर, 4 स्टाफ,नर्स एवं लगभग इतने ही वार्ड बॉय की आवश्यकता पड़ती हैं। लेकिन तीन शिप्ट के हिसाब से ना ही डॉक्टर है और ना ही स्टाफ, बता दें कि यहाँ एक मेडिकल स्टाफ को एक रात ड्यूटी के बाद छुट्टी की आवश्यकता होती है। लेकिन अभाव के चलते लगातार ही ड्यूटी करके वह बीमार हो रहे हैं।

10 में से 6 स्टाफ और नर्स गर्भवती

महाराजगंज डीसीएचसी सह आइसोलेशन वार्ड में कार्यरत दस स्टाफ नर्स में छह घार्त एवं गर्भवती हैं। पूछताछ के दौरान अस्पताल में कार्य करने वाली एक सिस्टर ने रुंधे गले से जवाब देते हुए बताया कि पांच स्टाफ नर्स घार्त हैं। जिनके दुधमुंहे बच्चे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों के देखरेख के बीच थोड़े से समय निकालकर उन्हें अपने बच्चों को दूध पिलाना पड़ता है.

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