सारण के लोगो ने एक दिन के जनता कर्फ्यू का खुले दिल से किया समर्थन

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छपरा/पटना। देश में एक रोजा ‘जनता कर्फ्यू’ के बीच छपरा व सारण प्रमंडल ने काफी सहयोग किया। आप पूरे दिन पूरा जनता कर्फ्यू लगा रहा। शाम पांच बजे पूरे प्रमंडल में गांव,कस्बा व शहर में लोगो ने थाली,शंख व ताली बजाकर अपने योद्धाओं को सलाम किया। वैसे बिहार में कोरोना से मौत की पहली खबर चौंकाने और डराने वाली है! इस खबर ने दिल्ली से लेकर पटना तक के हुक्मरानों की शेखी की कलई खोल दी है।’जनता कर्फ्यू’ के निर्माता-निर्देशक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ‘चरण वंदना’ में लगी मीडिया और भक्त समूहों से विनम्रता पूर्वक पूछा जाना चाहिए कि अब जब कोरोना हमारे आंगन में आसन लगा चुका है,तो उससे हमारी रक्षा कौन करेगा?हमारी रक्षा ताली और थाली पीटने से होगी या इतिहास पुरुष बताये जा रहे नरेंद्र मोदी जी हमारी रक्षा करेंगे? जाहिर है हमारी रक्षा न तो मोदी जी कर पायेंगे और न ही ताली या थाली पीटने से हमारी जान बचेगी! हमारी जान तो अस्पतालों में बचेगी! हमारी रक्षा तो डाक्टर ही करेंगे! ऐसे में सवाल उठता है कि हमारी तैयारी कितनी मुकम्मल है।

बिहार की राजधानी पटना के AIIMS में कोरोना मरीज की मौत के खुलासे ने तो साबित कर दिया है कि अब तक तैयारी के नाम पर हमारे देश में जुमलेबाजी ही होती रही है। चीन के वुहान प्रांत में कोरोना का पहला मरीज दिसंबर महीने में मिला था। करीब तीन महीने होने को आये। इतने दिनों में पूरे देश में कोरोना जांच केंद्रों की संख्या 54 या 55 पर ही अटकी है। बिहार इसका सटीक उदाहरण है। RMRI, Patna को छोड़कर कहीं भी कोरोना जांच की कोई सुविधा नहीं है।जबकि बिहार में सरकारी मेडिकल कॉलेज थोक के भाव में स्थापित किये गये हैं! सवाल उठता है कि पिछले तीन महीने में केंद्र या राज्यों की सरकारों ने कोरोना से लड़ने के लिए किस स्तर की और कितनी तैयारियां की? जिस देश मे संक्रामक बीमारियों की जांच की व्यवस्था इतनी लचर है , उस देश के लोगों की रक्षा तो ताली या थाली पीटने से ही तो हो सकती है!‘जनता कर्फ्यू’ की कोई कितनी भी प्रशंसा कर ले, लेकिन हकीकत तो यही है कि मोदी जी की इस अपील से देशव्यापी हड़कंप मची है! दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत देश के तमाम बड़े शहरों में काम करने वाले दिहाड़ी या ठेका मजदूर, छोटे-मोटे रोजगार में लगे लाखों लोग अपने-अपने घरों की ओर भाग रहे हैं। उनमें सबसे अधिक बिहार और यूपी के लोग हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर हजारो लोग फंसे हैं। भूखे प्यासे लोगों को देख कर रोना आ रहा है।

इधर बिहार सरकार ने 31 मार्च तक बस सेवाएं बंद कर दी है।उधर, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से खुली स्पेशल ट्रेनों में लद कर भारी भीड़ पहुंच रही है। हजारों की उस भीड़ की थर्मल स्कैनिंग कैसे होगी! क्योंकि पहले से कोई तैयारी नहीं है। अब बिहार सरकार ने स्पेशल ट्रेनों का परिचालन रोकने की अपील की है। ट्रेनों का परिचालन 31 मार्च तक रोक भी दिया गया है।

मरीज की मौत के बाद पता चला वह तो कोरोना संक्रमित था!

बिहार में कोरोना की जांच का इंतजाम आज भी केवल RMRI, Patna में उपलब्ध है! राज्य मे कहीं भी किसी संदिग्ध केस का सैंपल RMRI, Patna को भेजा जाता है। AIIMS , Patna में सैफ अली नाम के जिस मरीज की मौत हुई है। उसे संदिग्ध मान कर उसका ब्लड सैंपल RMRI, Patna भेजा गया था। AIIMS के निदेशक सीएम सिंह के मुताबिक सैफ पहले से किडनी का रोगी था। वह कतर से बिहार लौटा था। तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों ने उसे AIIMS में भर्ती कराया था। उसकी ट्रेवल हिस्ट्री की जानकारी और उसके लक्षणों को देख कर उसका ब्लड सैंपल 20 मार्च को जांच में भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने से पहले 21 मार्च को सैफ की मौत हो गयी। कोरोना के एक संदिग्ध मरीज ने AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दम तोड़ा। लेकिन अस्पताल प्रबंधन नें कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये। सैफ की लाश परिजनों को सौंप दी गयी।हंगामा तब मचा जब सैफ की मौत के एक दिन बाद 22 मार्च को आयी जांच रिपोर्ट में उसे कोरोना का मरीज बताया गया। अब जो सवाल सबकी नींद उड़ा रही है,वह यह है सैफ की लाश कहां दफन हुई? उसके साथ आये लोग कहां गये? सैफ के संपर्क में आये परिजन अगर संक्रमित हुए होंगे तो उनसे संक्रमित हुए लोगों की पहचान कैसे होगी? AIIMS के निदेशक के पास इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है।

हां! निदेशक महोदय जांच रिपोर्ट आने में देरी का रोना जरूर रो रहे थे। वे कह रहे थे कि हमारे पास कोरोना जांच की सुविधा नहीं है। RMRI, Patna से रिपोर्ट पहले मिल गयी होती तो हम एहतियाती उपाय कर सकते थे। डॉ सिंह की इस लाचारगी पर हंसा या रोया जाये,आप खुद तय कर लें।

इनपुट: सीनियर जर्नलिस्ट चंद्रप्रकाश राज