सीवान में बीडीओ की मौत के बाद दहशत में लोग

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सिवान के हुसैनगंज की बीडीओ रहीं मनीषा प्रसाद (फाइल फोटो)

सीवान. हुसैनगंज.बीडीओ मनीषा प्रसाद की कोरोना से मौत के बाद पूरे जिले के लोगों में दहशत हैं।बताते चलें की बीडीओ मनीषा प्रसाद की मौत पटना के एक निजी अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन लेवल काफी कम होने की वजह से शनिवार की अहले सुबह लगभग चार बजे उनकी मौत गई। 38 वर्षीय मनीषा प्रसाद ने 22 फरवरी 2019 को हुसैनगंज प्रखंड में बीडीओ का पद संभाला था। इसके बाद प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों को काफी बल मिला। मनीषा प्रसाद एक तेज तर्रार बीडीओ के रूप में जानी जाने लगी थीं। प्रखंड कार्यालय में कार्यरत अधिकारी व कर्मियों के साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करती थीं। जिस कारण सभी प्रखंड कर्मी उन्हें पसंद करते थे। आमजनों की शिकायत पर फौरन एक्शन लेने के लिए भी वह मशहूर थीं। बीडीओ मनीषा प्रसाद की अनुशंसा पर ही प्रखंड कार्यालय के पूर्व नाजिर को वित्तीय अनियमितता के कारण सस्पेंड किया गया था।

मढ़ौरा की रहने वाली मनीषा 2013 में बनी थी बीडीओ

मनीषा प्रसाद मूल रूप से मढ़ौरा की रहने वाली थी, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई कोलकाता से की थी। पटना के एएन कॉलेज से अपनी पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई मुकम्मल कर उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। बीपीएससी की पहली परीक्षा में उन्हें सफलता मिली और 2013 में पहली बार उन्हें पटना के पंडारक प्रखंड का बीडीओ बनाया गया। इस दौरान आरा के रहने वाले अजय कुमार के साथ उनकी शादी हुई। पति अजय कुमार बैंककर्मी हैं। जिन्दगी बेहतर गुजर रही थी।

गले में खरास व जकड़न जैसी समस्या के बारे में दी थी जानकारी

हुसैनगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि 13 अप्रैल को बीडीओ मनीषा प्रसाद ने उन्हें फोन कर गले में खरास व जकड़न जैसी समस्या के बारे में बताते हुए तबीयत खराब होने की बात कही थी। इसके बाद डॉ. मनीष कुमार द्वारा सीवीसी, टाइफायड व मलेरिया की जांच के लिए कहा गया था। डॉ. मनीष ने बताया कि जांच में हीमोग्लोबिन व अन्य रिपोर्ट नॉर्मल थी परन्तु विडॉल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इस कारण एंटीजन किट से उनकी कोरोना जांच की गई जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बाद टायफायड की दवा दी गई थी। दवा से एक दिन आराम मिला मगर दूसरे दिन पुनः तबीयत खराब होने पर डॉ. मनीष द्वारा किसी अच्छे हॉस्पिटल में दिखाने के लिए मशवरा दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीवान स्थित डॉ. शंकर सिंह के हॉस्पिटल में इलाज शुरू करवाया। इधर आरटीपीसीआर की जांच के लिए पटना भेजे गए उनके सैंपल की जांच रिपोर्ट भी नेगेटिव आई थी। डॉ. शंकर सिंह के यहां तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें पटना स्थित संजीवनी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। जहां वो पिछले एक हफ्ते से इलाजरत थी। इसी दौरान जांच में डाक्टरों ने रिपोर्ट पॉजिटिव बताया। शुक्रवार की रात से ही उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। फलस्वरुप शनिवार की अहले सुबह लगभग चार बजे मौत गई.

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