पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मना समर्पण दिवस

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छपरा: मकेर भाजपा मंडल ने मंडल अध्यक्ष डा. सुचिन्द्र साह की अध्यक्षता में मंडल कार्यालय सहित मंडल के 42 बूथों पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय का समर्पण दिवस मनाया। मंडल अध्यक्ष डा सुचिन्द्र साह उपस्थित जन समुह को बताया की दीनदयाल उपाध्याय का जन्म २५ सितम्बर १९१६ को मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान ग्राम में हुआ था | इनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था ये नगला चंदभान( फरह, मथुरा) के निवासी थे | माता रामप्यारी धार्मिक वृत्ति की थीं। पिता रेल्वे में जलेसर रोड स्टेशन पर सहायक स्टेशन मास्टर थे |रेल की नौकरी होने के कारण उनके पिता का अधिक समय बाहर ही बीतता था। कभी-कभी छुट्टी मिलने पर ही घर आते थे। थोड़े समय बाद ही दीनदयाल के भाई ने जन्म लिया जिसका नाम शिवदयाल रखा गया। पिता भगवती प्रसाद ने बच्चों को ननिहाल भेज दिया। उस समय उनके नाना चुन्नीलाल शुक्ल धनकिया में स्टेशन मास्टर थे। मामा का परिवार बहुत बड़ा था। दीनदयाल अपने ममेरे भाइयों के साथ खाते खेलते बड़े हुए।

३ वर्ष की मासूम उम्र में दीनदयाल पिता के प्यार से वंचित हो गये। पति की मृत्यु से माँ रामप्यारी को अपना जीवन अंधकारमय लगने लगा। वे अत्यधिक बीमार रहने लगीं। उन्हें क्षय रोग लग गया। ८ अगस्त १९२४ को रामप्यारी जी का देहावसान हो गया। ७ वर्ष की कोमल अवस्था में दीनदयाल माता-पिता के प्यार से वंचित हो गये।

उपाध्याय जी ने पिलानी, आगरा तथा प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की। बी०.एससी० बी०टी० करने के बाद भी उन्होंने नौकरी नहीं की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता हो गये थे। अत: कालेज छोड़ने के तुरन्त बाद वे उक्त संस्था के प्रचारक बन गये और एकनिष्ठ भाव से संघ का संगठन कार्य करने लगे। उपाध्यायजी नितान्त सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे।

सन १९५१ ई० में अखिल भारतीय जनसंघ का निर्माण होने पर वे उसके संगठन मन्त्री बनाये गये। दो वर्ष बाद सन् १९५३ ई० में उपाध्यायजी अखिल भारतीय जनसंघ के महामन्त्री निर्वाचित हुए और लगभग१५ वर्ष तक इस पद पर रहकर उन्होंने अपने दल की अमूल्य सेवा की। कालीकट अधिवेशन (दिसम्बर १९६७) में वे अखिल भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। ११ फरवरी१९६८ की रात में रेलयात्रा के दौरान मुगलसराय के आसपास उनकी हत्या कर दी गयी।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से सारण लोकसभा सह प्रभारी राम दयाल शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी के विचार आज भी प्रशांगिक है । वे अपने पूरे जीवन काल मे राष्ट्र निर्माण के कार्य मे लगे रहे ।उपस्थित प्रमुख नेताओं में जिला उपाध्यक्ष निरंजन शर्मा, नागेश्वर बैठा, भीम राय, आकाश साह,शैलैश कुमार शर्मा, बीरेन्द्र ठाकुर, अनिल सिंह, सुमित कुमार सिंह, रंजीत शर्मा, सुमन शर्मा, डा. सिया राम शर्मा, सबिता सिंह, रामपुजन सिंह, म.सगीर,शिवनाथ माँझी ,धठु माझी, पुनकाल महतो, सहित सैकड़ो कार्यकर्ता शामिल हुए.इनपुट चंद्र प्रकाश राज (छपरा सारण)

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