पहली अर्घ्य के साथ महापर्व छठ की शुरूआत

0

पटना: बिहार समेत देश के कई राज्यों में डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ-साथ महापर्व छठ की शुरुआत हो गई। तो वहीं अन्य राज्यों में नदियों, नहरों के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रहीं है। छठ त्योहार की खूबसूरत झलकियां देश के कई राज्यों में देखने को मिल रहीं है।


बिहार में मनाए जाने वाले सबसे बड़े छठ महापर्व में सोमवार की सुबह भक्तों ने खरना की रस्मा अदा कर व्रत रखा। खरना की रस्म के लिए भक्तों ने सूर्य उदय से पूर्व पूजा अर्चना कर फलाहार कर व्रत रखा। फलहार में चावल व कद्दू से बने पकवान खाए गए।

● सूर्य देव की आराधना का पर्व है छठ

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाला यह पर्व सूर्य देव की उपासना का पर्व है। संभवतः यह अकेला ऐसा पर्व है, जिसमें उदय होते हुए सूर्य को अर्ध्य देते हैं, वहीं शाम को अस्त होते हुए सूर्य को भी पानी के अंदर खड़े होकर अर्ध्य अर्पित किया जाता है। इस अर्ध्य में सबसे अधिक महत्व देशी गाय के दूध का है।

अर्ध्य के दौरान पानी से भरे बर्तन में गाय का दूध मिलाया जाता है। मान्यता है कि इस पर्व को करने से संतान सुख, दाम्पत्य सुख एवं निरोग सुख सहित ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को महिला एवं पुरूष दोनों रखते हैं। पौराणिक ग्रंथों में भी इस पर्व का जिक्र मिलता है।

वहीं ग्रंथों के अनुसार इस पर्व की शुरूआत महाभारत काल में कर्ण ने की थी। जहां पर सरोवर या नदी की व्यवस्था नहीं होती है वहां पर लोग अपनी छतों पर पीतल की परात में पानी रखकर अर्ध्य देते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here