महाराजगंज पीएचसी पर रात्रि कालीन चिकित्सा सुविधा नहीं

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अंधेरा होते ही स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं मिलते चिकित्सक

फ़ोटो: युवक का इलाज करते कंपाउंडर

महाराजगंज.अनुमंडलीय शहर मुख्यालय में स्थित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रात में चिकित्सक मिलते नहीं हैं। रात में कोई इमरजेंसी मामला आता है तो यहां अस्पताल की गेट खोलवाने के लिए घंटों गिड़गिड़ाने पड़ते हैं, बीते रात बुधवार को करीब 1:07 बजे भी कुछ ऐसा ही हुआ जहां महाराजगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज के स्वजन मरीज को लेकर घंटों चिलाते रहे कि कोई चिकित्सक उनकी मदद करें। लेकिन घंटों चिलाने गेट पीटने के बाद भी किसी ने नहीं सुना। अस्पताल में अंधेरा था। कुछ लाईटें जल रहीं थी। तो कई बुझे हुए थे। काफी देर आवाज़ लगाने के बाद अंदर से किसी की आवाज़ आई कि जरा ठहरिये डॉक्टर ड़ी.नारायण को बुलाकर लाता हूँ। इसके बावजूद भी डॉक्टर साहब नहीं पहुंचे। घटना के संबंध में बताया जाता है कि बुधवार की रात रुकुन्दीपुर निवासी श्याम सुंदर सिंह के पुत्र सुरेश सिंह एवं मोहन बाजार महाराजगंज में किराए के मकान में रहने वाले रंजीत कुमार सिंह के पुत्र चंद्र भूषण सिंह बाइक सवार दोनों युवक तिलक समारोह से होकर अपने घर महाराजगंज लौट रहे थे, इसी दौरान दरौंदा-महाराजगंज मुख्य मार्ग पर उजाँय के समीप पांच की संख्या में अपराधियों ने दोनों युवकों के साथ पहले तो मारपीट की इसके बाद बाइक सवार एक युवक को चाकू घोंपकर गंभीर रूप से घायल कर दिया.उसके बाद पॉकेट से मोबाइल भी लेते गए। अपराधियों की मारपीट से जख्मी दोनों युवक किसी तरह महाराजगंज पहुंचे जहां प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें महाराजगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। अब सवाल यह उठता हैं कि कोरोना जैसे महामारी के बीच लोगों की जान आफत की घड़ी में हैं। बदलते मौसम में लोगों को एक-एक लक्षण कोरोना दिख रहा हैं.ऐसे में मरीजों को डॉक्टर की सलाह की काफी आवश्यक हैं. कुछ लोगों की मौतें तो सकारात्मक सोच नहीं होने की वजह से हो रही है. इमरजेंसी के वक्त हमारी रक्षा के लिए जो ड्यूटी पर तैनात हैं। जिन्हें हम भगवान की दर्जा देते हुए नहीं चूकते हैं। वही अपने कर्तव्य से भागते-छिपते नजर आ रहे हैं। बता दें कि महाराजगंज शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल में केवल रेफर कर खानापूर्ति कर दी जाती है। यहां रात्री में चिकित्सक नहीं होते हैं तो केवल अस्पताल का एक कर्मचारी जिन्हें दरवान के रूप में रखा गया हैं। अगर डॉक्टर साहब समय से पहुंचे तो ठीक है नहीं पहुंचे तो दरबान के रूप में कार्यरत कंपाउंडर ही डॉक्टर साहब की जिम्मेदारी निभाता है,अब ऐसे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है.

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