माँ अम्बिका भवानी आमी में होती है,सबकी मनोकामनाएं पूरी

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छपरा। आमी के अम्विका माॅ का जिक्र मार्कण्डेय पुराण मे भी मिलता है जिसमे राजा सूरथ व समाधि वैश्य द्वारा गंगा तट के पास माॅ अम्विका के मिट्टी की पिण्डी बनाकर कठोर साधना का जिक्र मारकण्डेय मुनि द्वारा किया गया है।इसका विस्तार से चर्चा दुर्गा सप्तशती के पहले व तेरहवे अध्याय मे है । राजा सुरथ व वैश्य के कठोर साधना की कहानी मार्कण्डेय मुनी ने दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यो मे कुल 700 श्लोको मे की है जिसका साक्ष्य माॅ अम्विका भवानी के मिट्टी के पिण्डी के सटे उत्तर दिशा मे गंगा कुण्ड से सिद्ध होता है।उस छोटे से गंगा कुण्ड मे कभी गंगाजल कम नही होता।भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए उस जल कुण्ड मे हाॅथ डालते है ।दुर्गा सप्तशति के तेरहवे अध्याय के सातवे,आठवे व नवे श्लोक मे लिखा है”इति तस्य वचः श्रुत्वा सुरथः स नराधिपः।प्रणिपत्य महाभागं तमृषिं शंसितव्रतम्।नर्विण्णोडतिममत्वेन राज्यापहरणेन च।जगाम सद्यस्तपसे स च वैश्यो महामुने।संदर्शनार्थमम्म्बाया नदीपुलिनसंस्थितः।

अर्थात मेधा मुनि के वचन सुनकर राजा सुरथ व समाधि वैश्य तत्काल नदि तट पर तपस्या को चले गये।मार्कण्डेय मुनि ने लिखा है कि नदी तट पर मिट्टी का पिण्डी बनाकर दोनो ने कठोर साधना की जिससे अम्विका देवी को प्रकट होकर मनोरथ पूर्ण होने का वरदान देना परा।वही मिट्टी की पिण्डी आज संसार मे मनोरथ पूर्ण करने वाली पिण्डी के रूप मे बिहार राज्य के सारण जिले के आमी धाम मे गंगा तट पर स्थित है ।सिद्ध पीठ आमी मे न सीर्फ बिहार के बल्कि दूसरे राज्यो से भी सिद्धदात्री अम्विका के मिट्टी के पिण्डी का दर्शन करने के लिए नवरात्रि मे खास तौड पर भक्तो का शैलाब देखा जाता है।ऐसा कहनो है मंदिर के पूजेडी गणेश तिवारी,लक्ष्मीश्वर तिवारी,नीलु तिवारी,भीखम बाबा,मुन्ना बाबा,संतोष तिवारी राजेश तिवारी कुमुद तिवारी आदि व पटना से हर नवरात्रि मे पाठ व उपासना करने आने वाले हस्त रेखा विशेषज्ञ काशीनाथ मिश्र कि मैया अम्विका सिद्ध दात्रि है 51 शक्ति पीठो मे प्रमुख है सिद्ध पीठ आमी जहाॅ सच्चे मन से भगवती का आरधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है और किस्मत के बंद दरवाजे मैया खोलती है।अम्विका मंदिर मे कात्यायनी मैया के स्वरूप का दर्शन करने के लिए प्रातः तीन बजे से ही सुबह के आरती के बाद भक्तो का जन शैलाब उमरने लगा।दिन भर भक्तो का आना जाना लगा रहा।शुक्रवार होने के कारण विशेष भीड थी.Input):चंद्रप्रकाश राज/राजेश तिवारी

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