माता के चरण छूने में समस्त तीर्थ का पूण्य प्राप्त होता है। “अम्रतानंद जी महाराज”

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सिवान: महाराजगंज प्रखंड के रतनपुरा गांव के शिव मंदिर परिसर में श्री सीताराम महायज्ञ प्रथम दिन अयोध्या धाम से पहुंचे कथा वाचक बाल ब्यास अम्रतानंद जी महाराज ने संध्या प्रवचन में कहां कि रामायण हमारे चरित्र का निर्माण करने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहां कि चरित्रवान व्यक्ति को हर जगह सम्मान प्राप्त होता है। महाराज ने कहां कि धनवान से निर्धन डरता है। बलवान से निर्बल डरता है। बुद्धिमान से मूर्ख डरता है। लेकिन चरित्रवान से धनवान, बुद्धिमान व बलवान तीनों डरते है। अपने चरित्र के बल पर प्रभू श्रीराम ने रावण जैसे चौदहों भुवन के राजा को परास्त किया। इसलिए हमें रामायण व श्रीराम के जीवन से सिख लेनी चाहिए। यह हमें जीने की कला सिखाती है। जिनके घरों प्रतिदिन रामायण का पाठ होता है। उनके घर में श्रीराम के चरित्र जैसे बालक जन्म लेते हैं। नित्य उठकर माता पिता के चरण स्पर्श करनी चाहिए। माता के चरण छूने मे समस्त तीर्थ का पूण्य प्राप्त होता है। पिता के चरण स्पर्श करने सभी देवताओं के दर्शन होते है। संत ने कहां की जहां यज्ञ होता है वहां देवता विराजते हैं। देवता भी यज्ञ भूमि को नमन करते हैं। महायज्ञ को ले रविवार को विधिवत पंचांग पूजन सह मंडप प्रवेश पूजन किया गया। यज्ञाचार्य वेदाचार्य अभिमन्यु शास्त्री, आचार्य रितेश उपाध्याय, पंडित रिपुंजय शास्त्री,राकेश बाबा, श्यामनंदन शास्त्री,ओमजीत शास्त्री, अनूप शास्त्री व सुधीर शास्त्री के सामूहिक बैदिक मंत्रोचार से पूरे क्षेत्र में भक्ति की सरिता बहने लगी है। इससे पूर्व मुखिया रमेश यादव ने संत का स्वागत किया। मौके पर मुकेश चौधरी,विनय पांडेय, मंटू तिवारी,गौतम पांडेय,मुटुन पांडेय, सुधांशु पांडेय,दिनेश्वर तिवारी, संजय साह, अरुण चौरसिया, संजय तिवारी,पिंकी कुमारी समेत अन्य सैकड़ों की तादाद में भक्तगण मौजूद रहे।

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