पति के साथ निष्ठा पूर्वक किया गया प्रेम कभी निष्फल नहीं होता:सपना नंदनी

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महाराजगंज. पति के साथ निष्ठा पूर्वक किया गया प्रेम कभी निष्फल नहीं होता। पति भक्ति के आगे विधि का विधान बदल जाता है। इसका उदाहरण सावित्री और सत्यवान की कथा में देखने को मिला। उक्त बातें अनुमंडल मुख्यालय के नखास चौक स्थित मां शक्ति स्वरूपा मंदिर के प्रथम वार्षिकोत्सव के पावन अवसर पर पत्रकार नगर में आयोजित सात दिवसीय श्री मद् देवी भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ पर विराजमान श्री धाम वृंदावन से आयी श्री मद् देवी भागवत कथा वाचिका सपना नंदनी जी ने कही। सुश्री नंदनी ने कहा भारत यदि महान है तो मातृ शक्ति के बदौलत। उन्होंने कहा कि सतयुग द्वापरयुग और त्रेतायुग में ऐसे कई साक्षात वर्णन है कि स्त्री के अटल प्रेम के आगे विधि का विधान बदल गया। स्वयं यमराज भी घबडा गये।

सावित्री के पति सत्यवान से अगाढ़ प्रेम,सास-ससुर के प्रति भक्ति ही थी कि यमलोक के मार्ग में सुर्य के तेज ताप को भी शिश झुकाना पड़ा। बैतरणी जब पार कर यमलोक पहुंचे यमराज भी नतमस्तक हो गये। सावित्री ने आखिरकार अपने वचन,भक्ति,सतित्व का बल के आगे विधि का विधान को भी बदल दिया। कलयुग में भी स्त्री शक्ति महान है। भक्ति के शक्ति के आगे सबको झुकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब-जब सनातन के संस्कृति पर अत्याचार बढ़ा है तब-तब माता जगत जननी धर्म की स्थापना के लिए अवतरित हो सृष्टि का कल्याण किया है। सरस्वती – सावित्री-यक्षवि-राधा-गायत्री ये पांच प्रकृति की देवी है।

उन्होंने देवी भागवत महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि समुंद्र मंथन से सृष्टि को चौदह रत्न प्राप्त हुए थे। जिनमें अमृत,वृष, एरावत हाथी,कामधेनु गाय,माता लक्ष्मी आदि शामिल है,माता लक्ष्मी का वरन भगवान विष्णु ने किया था। शतचण्डी महायज्ञ में विधिवत पूजा हेतू बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से आए हुए वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा पूजा पाठ किया गया। जिसमें आचार्य आदर्श भारद्वाज,आचार्य अंकित शांडिल्य,आचार्य मनीष,आचार्य रत्नेश जी, आचार्य अनिल जी,यज्ञाचार्य पंडित रासबिहारी उपाध्याय के वैदिक मंगलाचार्य से पूरा वातावरण भक्ति में हो गया है.

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