न्यायाधीश बने कमलेश व पप्पू बढा़या सारण का मान दोनो युवा मढ़ौरा के बरदहिया के है निवासी

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छपरा। कहते हैं न पंखों से कुछ नहीं होता हौसलो से उड़ान होती है और इसे चरितार्थ कर दिखाया है सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड अंतर्गत बरदहिया गांव का युवा कमलेश व पप्पू ने. उनका मानना है कि गांव हो या शहर मन में लगन हो तो कोई कार्य सफल होता है विश्वास करें तो….

जी हां ग्रामीण क्षेत्र के सामान्य परिवार में पले बढ़े कमलेश व पप्पू ने बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में प्रथम बार के ही प्रयास में ही सफलता प्राप्त की है. इसलिए ये कहना कि प्रतिभा कभी जगह और सुविधा की मोहताज नहीं होता सही व सटीक है. अपनी मेहनत के दम पर भी सुविधा विहीन लोग कामयाबी के शिखर को छु लेते है और अब इसे शत प्रतिशत चरितार्थ करके दिखाया है प्रखंड के बरदहिया गांव के रहने वाले सामान्य परिवार दिलीप सिंह व पुष्पा देवी के पुत्र कमलेश कुमार सिंह व उनके बचपन के ही साथी पप्पू कुमार जो बरदहिया के ही कृष्ण पंडित व कांति देवी के पुत्र है.

चार वर्ष पूर्व तक गांव के गलियों में चहलकदमी करने वाले दोनो युवकों के मन में समाज के लिए कुछ करने की ईच्छा ऐसी जगी कि फिर एक निश्चय ने उसकी दुनिया ही बदल दी.अपने सपने को पूरा करने के लिए यूपी के बीएचयू से एलएलबी की पढाई पूरी कर जहां कमलेश अभी वर्तमान में यूजीसी नेट जेआरएफ क्वालीफाई कर बंगलोर में एसोसिएट प्रोफेसर है तो पप्पू गांव में ही रहकर घरेलू कार्य करते हुए अपनी तैयारी मे जुटे रहे.

पहले से ही देश के सर्वोच्य नयायालय में गरीबों के हक और न्याय की लड़ाई का सपना रखने वाले कमलेश व पप्पू को अब न्यायायिक सेवा में सफलता से उनके इरादे को अब मंजिल हासिल हो गई है. शुरू से ही मेधावी रहे कमलेश व पप्पू ने एक साथ गांव के ही मध्य विद्यालय व गांधी स्मारक उच्च विद्यालय, बरदहिया से अपनी प्रांरभिक शिक्षा ग्रहण की तो छपरा के जेपीयू से कमलेश जहां विज्ञान संकाय तो पप्पू कला संकाय से अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की.

दोनो युवकों के परिजन ग्रामीण गृहस्थ परिवार से तालुकात रखते हैं और इन्ही सिमित संसाधनों से अर्थ अर्जित कर दोनो युवकों को भी पढाई के लिए बनारस के बीएचयू भेजा।

दोनो युवक सामान्य परिवार से है घर के साथ साथ अपनी पढ़ाई व सपने को पुरा करने का लक्ष्य मन में था I और इसी लक्ष्य से दोनो युवकों का जीवन बदलता गया और परिजन द्वारा मुश्किल हालात में भी रूपया भेजते देख कुछ अलग करने के लिए मेहनत में जुट गये.

कमलेश बीएचयू से एलएलबी करने के बाद एलएलएम करने के लिए बैंगलोर चले गए और इसी बीच यूजीसी नेट में जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए क्वालीफाई कर एसोसिएट प्रोफेसर बने, तो पप्पू भी बीएचयू से ही एलएलबी करने के बाद अपनी मेहनत एवं सेल्फ स्टडी से बिहार न्यायायिक सेवा परीक्षा में जुट गए फिर एकसाथ दोनो युवकों ने सफलता पाकर माता पिता को खुशियों की बड़ी सौगात दी है. कमलेश व पप्पू ने सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया है। जिन्होंने स्वयं परिवार के भविष्य संवारने के लिए संघर्ष कर संघर्षशील पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरक बने।

इस सफलता से गांव से लेकर शहर तक बधाई देने वालों का तांता लग गया जिसमें रिबेल के निदेशक विक्की आनंद,भंवर किशोर, धर्मेन्द्र रस्तोगी पत्रकार, रूपेश कुमार,निखिल शाही, साकेत श्रीवास्तव,सुधीर कुमार चुनचुन व अन्य शामिल है.

इनपुट: सीनियर जर्नलिस्ट चंद्रप्रकाश राज

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