विदाई समारोह में छात्राएं अपने गुरुजी के पैर पर गिरकर फूट-फूटकर रोने लगीं लोगों की भर आईं आंखें- देखिए वीडियो

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शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसकी आंखों से आंसू की अविरल धारा न बही हो।

नवादा। किसी ने सही कहा है भारतीय संस्कृति अपने आप में श्रेष्ठ और सभ्य है। सन 1893 ई. में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में हुई धर्मों की संसद में भाग लिया था। विवेकानंद के विद्वानता व्याख्या ने लोगों को बहुत प्रभावित किया। उनका संपूर्ण भाषण का सार यह था कि हमें भौतिकवाद और अध्यात्मवाद के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित करना है। स्वामी विवेकानंद ने समस्त संसार के लिए एक ऐसा संस्कृति की परिकल्पना करते थे,जिसमें पश्चिमी के भौतिकवाद तथा पूर्वी के अध्यात्मवाद का एक ऐसा सामंजस्यपूर्ण सम्मिश्रण हो जो समस्त संसार को प्रसन्नता दे सकें। ऐसे ही नालंदा जिले से शिष्यो और गुरु की प्रेम को देख सबकी आंखों से आंसू छलक उठे। बताते चलें कि प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय ओहारी के प्रभारी प्रधानाध्यापक यमुना प्रसाद को सेवानिवृति उपरांत विद्यालय परिवार द्वारा विदाई समारोह आयोजित की गई थी। विद्यालय की छात्राओं के द्वारा प्रस्तुत विदाई गीत ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। विदाई गीत गाती हुईं छात्राएं अपने गुरुजी के पैर पर गिरकर फूट-फूटकर रोने लगीं जिसे देखकर वहां उपस्थित सभी लोगों की आंखें भर आईं।

सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक ने अपने संबोधन में कहा कि मैंने अपने तरफ से विद्यालय के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। बावजूद अगर किसी प्रकार की कमी रह गई तो मैं इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं। इसके पूर्व विद्यालय परिवार के द्वारा इन्हें अंग-वस्त्र, रामचरित्रमानस आदि भेंट किया गया। उपस्थित लोगों नें फूल मालाओं से उन्हें लाद दिया। वक्ताओं ने प्रधानाध्यापक के कार्यकाल को काफी सुखद व सराहनीय बताया, कहा कि इनकी सेवानिवृत्ति से विद्यालय परिवार अपना एक आदर्श अभिभावक से दूर हो रहा है. जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है.ग्रामीणों ने कहा कि इन्होंने जर्जर हो चुके विद्यालय को अपने वेतन व लोगों से जमा की गई राशि से चकाचक करने का काम किया।