अनेकता में एकता देखनी हो तो भगवान शंकर की परिवार से सीख लेनी चाहिए-अखिलेश किशोरी जी

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महाराजगंज। अनुमंडल शहर मुख्यालय में पिछले 5 दिनों से शुरू हुए मां दुर्गा अचल प्राण प्रतिष्ठा शतचंडी महायज्ञ,देवी भागवत कथा, राम कथा का रसपान कराने के लिए श्री धाम वृंदावन से अखिलेश किशोरी जी पधारी है.वही प्रभु श्री रामचंद्र की नगरी अयोध्या से रामायणी वैष्णवी जी पधारी है.जहां भक्त कथा श्रवण कर देर संध्या अपने घर को जाते हैं,रविवार रात्रि अपने प्रवचन काल के दौरान अखिलेश किशोरी ने बताया कि अनेकता में एकता देखनी हो तो भगवान शंकर के परिवार से सीख लेनी चाहिए,भगवान शंकर ही एक ऐसे है जिन्होंने कभी महल में नहीं रहे परंतु भगवान शंकर के शरण में रहने वाले को भवन नसीब अवश्य हुए.विघ्नहर्ता निर्माणकर्ता उन्हीं के पास थे अतः भगवान शंकर के परिवार से सीख लेकर आज कलयुग का परिवार धन्य हो सकता है.

वही राम कथा का वर्णन करते हुए अयोध्या से पधारे रामायणी वैष्णवी ने रविवार रात्रि राम जन्म उत्सव की कथा का रसपान करा रही थी। उपस्थित श्रोताओं के समक्ष कहते हुए राम के अवतार की ऐसी वर्णन कर डाली की उपस्थित श्रोता कुछ पल के लिए मानों पत्थर के समान हो गए वैश्णवी ने बताया कि राम जन्म की कथा श्रवण करना ही मुक्तिदायी है,उत्सवप्रिय है,मंगलकारी है, दुःख निवारण है.वहीं संध्या समय तीन बजें से रामकथा तथा छः बजे से देवी भागवत कथा के दौरान अखिलेश किशोरी जी ने बताया कि दुनिया में आकर सब कुछ जाना लेकिन जिसके पास जाना उसी को नहीं जाना तो फिर कष्ट निवारण, दुःखों का निराकरण कैसे होगा अतः भगवान के उस अनमोल अतुलनीय दृश्य का आनंद लेते रही सारे कष्ट स्वत:छू मंतर हो जाएगे-अवधेश किशोरी जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि दुनिया में आकर सब कुछ जाना, खाना पीना,रहना सोना पूजा पाठ सब कुछ लेकिन मृत्यु के पश्चात ईश्वर के पास जाना उसी को नहीं जाना तो परेशानी बढ़ जाएगी तो उसको जानों वही सब दिया है और देगा भी। कथा श्रवण के दौरान हरिशंकर आशीष, संजय सिंह,राजेंद्र प्रसाद,रामाशंकर प्रसाद,रामावती देवी,अनन्या उर्फ किट्टू समेत हजारों की संख्या में महिला श्रोता व पुरुष श्रोता मौजूद थे.

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