इसरो चंद्रमा से बिजली लाने में सफल हुआ तो मिलेगा 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से उपभोक्ताओं को बिजली

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इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि 400 साल में एक दौर ऐसा आता है जिसमें सूर्य के काले धब्बे (सन स्पॉट) कम होने लगते हैं। इससे तापमान में गिरावट आती है। वर्ष 1650 से 1715 तक का दौर ऐसा ही था। तब करोड़ों लोगों की जान गिरते तापमान की वजह से गई थी।

बंगलौर। इसरो का अगला प्रयास चंद्रमा को इलेक्ट्रि‍क हाउस बनाने का है यदि वहां से बिजली लाने में सफल हुए तो 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से हमें बिजली मिलेगी। वैज्ञानिकों की मानें तो उनका कहना है कि चंद्रमा का 54 प्रतिशत भाग रोशनी से भरा है। पर वहां से बिजली धरती पर लाना किसी एक देश के बस की बात नहीं है। इसके लिए सभी देशों को कहा जा रहा है, ताकि मिलकर यह काम किया जा सके। इसरो के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और चंद्रयान-2 अभियान से जुड़े रहे डॉ. राजमल जैन ने कहा कि आज पूरी दुनिया सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में काम कर रही है. इसरो चंद्रमा की तत्व संरचना का पता करने का प्रयास कर रहा है।डॉ. जैन ने कहा कि वैज्ञानिकों का प्रयास चंद्रमा के अलावा अन्य ग्रहों के उपग्रहों पर भी जीवन की तलाश में है। हम शनि ग्रह के चंद्रमा पर भी जीवन की संभावनाएं तलाश रहे हैं और वहां इसके सकारात्मक संकेत मिले हैं। अभी तक 100 से ज्यादा ऐसे ग्रहों का पता चल चुका है, जिन पर जीवन की संभावना हो सकती है।

400 साल में एक बार आता है तापमान में गिरावट

डॉ. जैन के मुताबिक, अमूमन हर 400 साल में एक दौर ऐसा आता है जिसमें सूर्य के काले धब्बे (सन स्पॉट) कम होने लगते हैं। इससे तापमान में गिरावट आती है। वर्ष 1650 से 1715 तक का दौर ऐसा ही था। तब करोड़ों लोगों की जान गिरते तापमान की वजह से गई थी। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव यूरोप में दिखा था। सन स्पॉट कम होने के कारणों पर शोध जारी है। वर्तमान में फिर ग्राफ नीचे की ओर जा रहा है।

भारत में 2025 के बाद बन सकती है ऐसी स्थिति

ग्राफ को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि 2025 के बाद फिर ऐसी स्थिति बन सकती है.पर यह बात 2022-23 में पता चलेगी कि सन स्पॉट कम हो रहे हैं या नहीं। यदि ग्राफ नीचे जाता है तो जहां तापमान 15 डिग्री होता है वहां 5 डिग्री तक हो जाएगा। यह स्थिति दशकों तक रहती है। ऐसे में जन्मदर कम और मृत्युदर अधिक हो जाती है।