राशि की बाट जोह रहे फायर ब्रिगेड कर्मी, डीजल के अभाव में बंद पड़ी है दमकल वाहन

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सिवान: महाराजगंज में फायर विभाग के कर्मी आए दिनों काफी मुश्किलों से गुजर रहे हैं। दरअसल फायर ब्रिगेड में डीजल के लिए राशि उपलब्ध न होने से काफी परेशानी बढ़ी हुई है। अब विभाग की दमकल डीजल के अभाव में कब बंद हो जाए कुछ कहां नहीं जा सकता है। क्योंकि विभाग से पिछले सवा दो महीने से डीजल का पैसा नहीं मिल रहा है। विभाग के कर्मी सहयोग कर डीजल भरवा रहें हैं। लेकिन कर्मियों का वेतन भी इतने ही दिनों से बंद है। जिसके चलते कर्मी अब सहयोग कर भी डीजल नहीं भरवा पाएंगे। पिछले 68 दिनों से वेतन नहीं मिलने से उनके सामने भी समस्या उत्पन्न हो गई है। दीपावली के बाद से अबतक दस आगलग्गी की घटना भी हुई है। मानवता के नाते पदाधिकारी व कर्मी मिलकर अपनी जेब से अग्निशमन की गाड़ी में डीजल भरवाया। जिससे दमकल आग बुझाने के काम आया। लेकिन अब कर्ज लेकर भी दमकल में डीजल नहीं भरा पाएगा। दमकल गाड़ी में तेल भरवाने से पदाधिकारी व कर्मी कर्ज में डूब गए हैं। वेतन नहीं मिलने व कर्ज लेकर तेल भरवाकर आग बुझाते बुझाते इनके पेट की आग धधकने लगी है। मिली जानकारी के अनुसार वेतन नहीं मिलने से इनके सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। टैंक में जो तेल है उसके खत्म होने बाद दमकल गाड़ी ऑफ रन हो जाएगी। यानि तेल के अभाव में नहीं चल पाएगी।

■ फायर ब्रिगेड के लिए सरकार से नहीं मिल रहा डीजल की राशि

फायर ऑफिसर रामेश्वर पासवान ने बताया कि विभाग से डीजल का पैसा समय से नहीं मिलने से यह समस्या आई है। भूगतान के नियम में बदलाव के चलते परेशानी है। उन्होंने बताया कि पूर्व से दमकल गाड़ी में डीजल भरवाया जाता रहा है। बाद में पटना से चेक आ जाता था। जिसे स्थानीय एसबीआई के ब्रांच से क्लियर करा लिया जाता था। लेकिन अब नए नियम के अनुसार डीजल के पैसे का भूगतान जिला से होगा। जिससे मामला उलझ गया है। वही हाल वेतन का भी है। पूर्व में पटना के द्वारा वेतन खाते में डाल दिया जाता था। लेकिन वेतन भी अब सीवान से ही मिलेगा। जो पिछले दो महीने से नहीं मिल रहा है। दमकल के टैंक जो तेल है उसके खत्म होने बाद गाड़ी खड़ी हो जाएगी। क्योंकि हमलोगों का जेब भी खाली है।

विभाग के जर्जर भवन में लगता है मौत का डर

महाराजगंज में अग्निशमन विभाग की स्थापना सात साल पूर्व 30 मई 2011 को हुई थी। उस समय से आजतक जर्जर भवन में कार्यालय चल रहा। फायर ऑफिसर ने बताया कि कार्यालय का भवन खंडहरनुमा हो गया है। कब गिर जाए कोई ठिकाना नहीं है। छत की पपड़ी गिरते रहती है। जिसके चलते कार्यालय का अधिकांश काम बाहर ही करना पड़ता है। भवन बनाने के लिए पैसा आया लेकिन भूमि नहीं मिलने से वापस चला गया। बताया कि भवन बनाने के लिए प्रखंड परिसर में ही भूमि मिल गई है। लेकिन इससे संबंधित फ़ाइल अंचल कार्यालय में पांच माह से धूल फांक रही है। जिसके चलते निर्माण की प्रक्रिया बाधित है।

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