महाराजगंज सफेद-कुर्ता पायजामा में नेताओं के चाय की चुस्की के साथ ठहाके वाली धरोहर की मिट रहा अस्तित्व

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पूर्व मुख्यमंत्री स्व. महामाया प्रसाद सिन्हा,फोटो।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व.महामाया प्रसाद सिन्हा,फोटो।

महाराजगंज। प्रखंड के पटेढ़ी गांव निवासी बिहार प्रांत के रहे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. महामाया प्रसाद सिन्हा का धरोहर आज खंडहरों में तब्दील है,नई पीढ़ी तो उनके नाम से भी बेखबर है। जिस थाती पर सुबह से लेकर शाम तक कॉटन व लिनन के सफेद-कुर्ता पायजामा में नेताओं के चाय की चुस्की के साथ ठहाके होते थे वह चीझ आज भूमिगत हो गई है। शानदार अतीत की कहानियों को समेटे उनका आवास वर्तमान में अपनी वजूद को ही बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। राजीनीतिक इच्छा शक्ति व जन प्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते यह शानदार विरासत अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

सस्ती लोकप्रियता के पीछे जनप्रतिनिधि मनाते हैं उनका पुण्यतिथि

जनप्रतिनिधि सस्ती लोकप्रियता के पीछे आज किसी भी हद को पार करने को मजबूर है, स्व.महामाया बाबू की जयंती भी सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए पंडालों में मनाकर खानापूर्ति कर ली जाती है. हालांकि किसी दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय महामाया प्रसाद की ढलती विरासत पर किसी का ध्यान नहीं है.भले ही उनके शानदार इतिहास को भूला दिया जाए। गांव में बेहतर अस्पताल बनाने की उनकी सोच आजतक अधूरी है।

लोगों के अनुसार महामाया बाबू 1967 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। यह आजादी के बाद प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी। वे बिहार की राजनीति में त्याग व बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कभी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया। जिसका परिणाम था कि उनकी सरकार चली गई। महामाया बाबू का जन्म 1 मई 1909 को हुआ था। जबकि मृत्यु 12 फरवरी 1987 को हुई थी। उनकी जयंती व पुण्यतिथि को राजकीय दर्जा दिलाने की मांग की जा रही है।

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