जनप्रतिनिधियों के अकर्मण्यता का ही प्रभाव है जिसकी वजह से महाराजगंज में न तो जिला बना और न ही व्यवहार न्यायालय की स्थापना हुई

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महाराजगंज। अनुमंडल व्यवहार न्यायालय की स्थापना नहीं होने से अधिवक्ता संघ ने सोमवार को एक बार फिर अपने कार्यकाल को बाधित कर एक दिवसीय धरना दिया.मामल महाराजगंज अनुमंडल में प्रस्तावित व्यवहार न्यायालय का है.अधिवक्ताओं के अनुसार यह बताया गया कि अब षड्यंत्र के तहत अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय को सीवान में संचालित करने की बात कही जा रही है.जिसकी वजह से बुद्धिजीवी,व्यवसाई,अधिवक्ता इसका पुरजोर विरोध कर रहे है.

धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने बताया कि महाराजगंज में प्रस्तावित अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय को दूसरी जगह पर ले जाया गया तो महाराजगंज की जनता आंदोलनरत हो जाएगी.धरने पर बैठे वक्ताओं ने बताया कि जनप्रतिनिधियों के अकर्मण्यता का ही प्रभाव है जिसकी वजह से महाराजगंज में न तो जिला बना और न ही व्यवहार न्यायालय की स्थापना हुई.उन्होंने कहा कि अगर व्यवहार न्यायालय का उपस्कर वापस ले जाया जाता है तो महाराजगंज की जनता आमरण अनशन करेगी.और अनुमंडल के सभी अधिवक्ता अनिश्चितकालीन धरने पर चले जाएंगे.

एक साल पूर्व भी हुई थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

गजब की बानगी है कि महाराजगंज अनुमंडल के गठन हुए 29 वर्ष हो गये लेकिन इन 29 वर्षो में भी महाराजगंज पूर्णरूपेण अनुमंडल नहीं बन सका।इस लोकतांत्रिक देश के दो स्तंभ “न्यायपालिका और कार्यपालिका” के बीच गहन साजिश के तहत महाराजगंज की आम जनता ढ़ाई दशकों से पीस रही है। महाराजगंज अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय की स्थापना को लेकर महाराजगंज की आम जनता के तरफ से अधिवक्ता संघ बार-बार न्याय की मंदिर में अर्जी देते हैं और हर बार उस अर्जी पर सुनवाई की बात कह कर टाल दिया जाता है.

15 फरवरी 2019 को अधिवक्ता संघ ने पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश को सौंपी थी अर्जी

महाराजगंज के आम जनता के तरफ से अधिवक्ता संघ के सचिव दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह की न्यायालय में अर्जी दी थी.अधिवक्ताओं ने अपने अर्जी में महाराजगंज व्यवहार न्यायालय को शीघ्र शुरू कराने की बात कही गई थी.

तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के द्वारा महाराजगंज अनुमंडल की हुई थी घोषणा

1 अप्रैल 1991 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने महाराजगंज के अनुमंडल होने की घोषणा की थी। उसी दिन से महाराजगंज, दरौंदा, बसंतपुर, भगवानपुर हाट, लकड़ी नवीगंज व गोरेयाकोठी प्रखंड को मिलाकर महाराजगंज अनुमंडल अस्तित्व में आ गया। गंडक परिसर में काम भी होने लगा। हालांकि यहां व्यवहार न्यायालय के उद्घाटन की मांग को ले धरना, प्रदर्शन व आंदोलन चलता रहता है। अनुमंडलीय अधिवक्ता संघ के सचिव दिनेश प्रसाद सिंह ने बताया कि महाराजगंज के साथ बने अनुमंडल में व्यवहार न्यायालय का उद्घाटन हो गया है। लेकिन, दुर्भाग्य से महाराजगंज में सभी संसाधन रहने के बावजूद व्यवहार न्यायालय की स्थापना नहीं होना आश्चर्य का विषय है। बताया कि पुराने अनुमंडल कार्यालय में 16 लाख की लागत से न्यायिक प्रकोष्ठ की स्थापना भी हो गई है। कर्मचारी भी नियुक्त हो गए। 26 मई 2015 को उद्घाटन की तिथि भी तय हो गई। लेकिन, किसी कारणवश उद्घाटन नहीं हो सका। जिसके चलते कीमती उपस्कर व उपकरण बेकार पड़े हैं। वहीं बहाल कर्मचारी समय काट रहे हैं। बताया कि इतने लंबे समय बाद व्यवहार न्यायालय का नहीं होना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कमजोर इच्छाशक्ति का परिचायक है। अनुमंडल क्षेत्र में महाराजगंज व दरौंदा को मिलाकर एक एमपी व दो विधायक हैं। व्यवहार के लिए अधिवक्ता संघ कई लड़ाइयां लड़ चुका है। लेकिन सिर्फ सांत्वना मिली है.

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