श्रीराम कथामृत से भक्त हो रहे है मंत्रमुग्ध

0

छपरा। गडखा प्रखंड के नराॅव गाॅव मे पिछले सप्ताह से चल रहे इक्कीस दिवसीय श्रीराम कथामृत पान कर आस-पास के नर-नाडी पा रहें है आध्यात्मिक व नैतिक शिक्षा।कथा के माध्यम से कथावाचक अमरदेव ठाकुर नैतिक शिक्षा देने से नहीं चुकते जिसको सुन श्रधालुभक्त भक्तिमय माहौल मे मंत्रमुग्ध हो रहे है।शनिवार को रात्री मे कथावाचन करते हुए कथावाचक ने अयोध्या काण्ड मे गुहराज निषाद व लक्षमण के संवाद की व्याख्या की और कहा कि राजाधिराज श्रीरामचंद्र व जानकी को जमीन पर सोते देख जब असह्य कष्ट हुआ और माता कैकयी को निषाद ने दोषी मान बैठा तो शेषनाग रूपी लक्ष्मण ने उनके भ्रम को दूर करने व माता कैकयी को निर्दोष सावित करने के लिए भगवान श्रीराम को सोते जान अपना उपदेश दिया।

“बोले लखन मधुर मृदु बानी ।ग्यान बिराग भगति रस सानी।।
काहु न कोउ सुख दुख कर दाता।निज कृत करम भोग सबु भ्राता।”

अर्थात ज्ञान,वैराग्य और भक्तिके रससे सनी हुई मीठी और कोमल वाणी बोलते हुए लक्ष्मण ने कहा कोई किसीको सुख-दुःख देनेवाला नही है।सब अपने ही किये हुए कर्मोका फल भोगते है।संयोग,वियोग अर्थात मिलना विछरना,भले बुरे भोग,शत्रु,मित्र और उदासीन ये सभीं भ्रम के फंदे है।जन्म-मृत्यु,सम्पत्ति -विपत्ति,कर्म व काल ये सब जगत के जंजाल है।मनुष्य को सदैव स्थिर चित्त से सोंच-समझकर कोई कठोर वचन या किसी पर दोषारोपण करना चाहिए सब प्रभु की ईच्छा से होता है इसमी किसी का कोई दोष नहीं फिर माता कैकयी कैसे दोषी है।यदि मनुष्य इन बातो को भली भांति समझ ले तो किसी को किसी से बैर नहीं होगा और सभी हान-लाभ,जीवन-मरण,जस-अपयश को नियती मान कर स्वीकार करे तो किसी को किसी से शत्रुता का भाव पैदा नहीं होगा और जब शत्रुता नहीं होगी तो हिंसा नहीं होगा और हर जगह अमन चैन कायम रहेगा।इसतरह से कथा के माध्यम से उन्होंने नैतिक शिक्षा भी दी उसके बाद कथा की आरती कर प्रसाद बाॅट कथा विश्राम दिया.

इनपुट:चंद्रप्रकाश राज/राजेश तिवारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here