coronavirus:बिहार कारा विभाग ने सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों को पैरोल पर रिहा करने का संकेत दिया

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पटना। बिहार के जेलों में कोरोना महामारी की वजह से लगातार फैल रहे संक्रमण पर रोकथाम लगाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। तो वहीं दूसरी तरफ संक्रमण को रोकने के लिए कारा विभाग ने सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों को पैरोल (Parole) पर रिहा करने का संकेत दिया हैं।

यह फैसला इसलिए लिया गया है कि कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण को रोकने और जेलों में ह्यूमन डिस्टेंसिंग बनाये रखने के लिए कैदियों की भीड़ को कम करने की कोशिशें हैं। इधर कारा विभाग के संकेत मिलने के बाद जिले के सभी जेलों में भीड़ कम करने की कोशिश जारी कर दी गई हैं। यानी कि 7 वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों को पैरोल (Parole) पर रिहा किया जायेगा।बिहार के सभी जेलों को को ऐसे कैदियों की सूची बनाने को कहा गया है. अनुमात: सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों की संख्या 450 से अधिक हो सकती है. सूबे के सबसे बड़े बेउर जेल में फिलहाल साढ़े चार हज़ार से अधिक कैदी बंद हैं.कारा विभाग द्वारा मुख्यालय स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है. यह कमेटी जेलों में बंद सजावार कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के बारे में अंतिम तौर पर फैसला लेगी.इधर बिहार के कुछ जेलो में सात और दस साल की सजा काट चुके कैदियों की सूची लगभग तैयार है. गृह विभाग से अधिसूचना जारी होते ही इन्हें रिहा करना शुरू कर दिया जाएगा. हालांकि पैरोल पर रिहा होने में कैदियों के लिए स्थानीय थाने की रिपोर्ट और बतौर कैदी जेल में उनका व्यवहार कैसा रहा है, यह काफी मायने रखेगा. ऐसे कैदी जो जेल में रहकर भी बाहर अपराध में इन्वॉल्व रहे है उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा. जेल आइंजी मिथलेश मिश्र की पहल पर बिहार के सभी जेल प्रशासन ने कैदियों से मुलाकात की व्यवस्था में नायाब तरीका अपनाया है.बेउर जेल में सजावार कैदियों की संख्या तो लगभग 1400 है लेकिन विचाराधीन कैदियों की संख्या काफी बहुत है.यहां साढ़े चार हजार कैदियों में 3 हज़ार से अधिक विचाराधीन कैदी हैं. वैसे देखा जाए तो बेउर जेल की क्षमता भी 3000 से 3200 कैदियों के रखने तक ही सीमित है. सात से दस साल तक सजा काट चुके कैदियों को अगर पैरोल पर छोड़ने का फैसला हुआ तो फिजिकल डिस्टेंसिंग को काफी हद तक मेंटेन किया जा सकता है.

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