महाकवि काशीनाथ पांडेय की 86 वीं जयंती पर बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन आयोजित करेगा शोध व्याख्यान प्रतियोगिता

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रसूलपुर थाना क्षेत्र के योगिया गांव के थे महाकवि पांडेय

◆◆ भोजपुरी के क्लासिक फिल्में गंगा आबाद रखीह सजनवा के व सोहाग बिंदिया के पट कथा संवाद लेखन किया था महाकवि पांडेय ने

छपरा। रसूलपुर देश की मूर्धन्य साहित्यिक संस्था बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने अपने शताब्दी वर्ष की कैलेंडर में महाकवि काशीनाथ पाण्डेय की जयन्ती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने को शामिल किया है।इसी कड़ी में 8 मार्च 2020 को जयंती समारोह के उपलक्ष में महाकवि पाण्डेय पर केंद्रित शोध व्याख्यान प्रतियोगिता का प्रारंभ हो रहा है।जिसमें स्नातक,स्नातकोत्तर और शोध छात्र-छात्राएँ भाग लें सकेंगे। महाकवि के पुत्र अविनय काशीनाथ ने बताया कि कि तीनों श्रेणी में स्वर्ण,रजत और कांस्य पदक विजेता घोषित होंगे, वहीं किसी महाविद्यालय/विश्वविद्यालय से सर्वाधिक पदक विजेताओं के आधार पर उस महाविद्यालय/विश्वविद्यालय को ओवरऑल चैंपियन घोषित कर रनिंग शील्ड दिया जाएगा एवं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की कला मंत्री व ख्याति प्राप्त टीवी उद्घोषिका पल्लवी विश्वास ने बताया कि प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित है जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र छात्राएं भाग लेंगे।साहित्य सम्मेलन के अनुसार प्रतिभागी कला मंत्री पल्लवी विश्वास के ह्वाटसप नंबर 9939593094 पर संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं और अपना व्याख्यान[email protected] पर भेज सकते है.मालूम हो कि सारण जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र की असहनी पंचायत के योगिया गांव निवासी भाषाविद् महाकवि काशीनाथ पाण्डेय बीती सदी के महत्वपूर्णतम साहित्यक हस्ताक्षर के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने अपनी मौलिक भाषागत प्रयोगधर्मिता से हिन्दी को समृद्धि दी।महाकवि पांडेय की प्रसिद्धि काव्य ग्रंथ बयाने- ए- क्रौच तायर की दर्जनों कविताएं सुर्खियों में रही हैँ। गंगा आबाद रखीह सजनवा के और सोहाग बिंदिया जैसी भोजपुरी की क्लासिक फिल्मों में महाकवि पांडेय ने पट कथा संवाद लेखन कर भोजपुरी के प्रति भी अपना अनुराग दर्शाया था.

इनपुट:चंद्रप्रकाश राज/रामेश्वर गोप

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