कलेक्टर कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने 500 करोड़ रुपये की जमीन हेर-फेर कर लोगों में बेच दी…

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भोपाल। जिले में राज्य सरकार की करोड़ों की संपत्ति को कागजी हेर-फेर कर बेच देने का मामला सुर्खियों में है। बताया जा रहा है की भोपाल कलेक्टर कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने 500 करोड़ रुपये की जमीन हेर-फेर कर लोगों से बेच दी थी। इस कारनामे का मास्टरमाइंड चपरासी बाबूलाल को भोपाल की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है, इसके अलावे कोर्ट में कर्मचारी रही रुपश्री जैन को 7 साल तथा एक अन्य को 10 साल की सजा सुनाई गई है। तीनों ने मिलकर भोपाल की करोड़ों की सरकारी जमीन को फर्जी कागज बनाकर खरीद-फरोख्त कर दिया. जिला जज ने किया था खुलासा- तत्कालीन जिला जज रेणु शर्मा ने इस भ्रष्टाचार के बारे में आर्थिक अपराध शाखा को जानकारी दी थी. दरअसल, जज रेणु शर्मा को जानकारी मिली थी कि कोर्ट से एक सर्टिफाइड कॉपी निकाली गयी है, जिसके बाद उन्होंने इसकी छानबीन की, जिसके बाद बड़े घोटाले की ओर उनकी शक गयी. वहीं, ईओडब्ल्यू ने चार्जशीट के दौरान पाया कि जिस दस्तावेज पर जमीन का खेसरा और खाता था वो उर्दू में था. आरोपितों ने इसी का फायदा उठाया और मामले में सभी फर्जी कागजात बनवा लिए. क्या था मामला- 2003-2007 के बीच बाबूलाल सुनहरे कलेक्टोरेट मे चपरासी के पद पर तैनात था. इस दौरान उसने कुछ वकील के साथ मिलकर राजस्व भूमि के मामलों में फर्जी पट्टे तैयार किया और राजस्व विभाग की फर्जी नोटशीट के साथ करोड़ों की संपत्ति आरोपियों के नाम करने में मदद की. बाबूलाल ने सरकारी जमीनों के फर्जी पट्टे तैयार कर नामांतरण कराने के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध भी कराये. इतना ही नहीं, आरोपियों ने अदालत में चल रहे सिविल के मामलों में कॉपिंग सेक्शन में पदस्थ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज को असल के तौर पर फाइलों में लगवाकर उनकी सर्टिफाइड कॉपियां भी निकलवा लीं. अदालत की सर्टिफाइड कॉपी को बाद में दूसरे केसों में असल दस्तावेजों के तौर पर पेश किया गया.अदालत में कर्मचारी रहीं रूपश्री जैन ने इस काम में उनका साथ दिया था.