​सीएम नितिश को सोशल मीडिया पर खुला खत लिखकर अपनी पीड़ा सुना रहे हैं। सांख्यिकी स्वयंसेवक।

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रिपोर्ट:कुमार विपेंद्र
पटना : सोसल मीडिया पर खुला खत लिखकर सांख्यिकी स्वयंसेवक बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम को अपनी पीड़ा सुना रहे हैं।बेरोजगरी का दंश झेल रहे इन सांख्यिकी कर्मियों की बात जायज भी है।क्योंकि इन बेरोजगारों से उनका रोजगार कथित सुशासन की सरकार में छीन लिया गया है।जो कार्य पहले ये सांख्यिकी स्वयंसेवक करते थे उस कार्य को अब शिक्षक,किसान सलाहकार इत्यादि कर्मी करते हैं।और इस कार्य के लिए किसान सलाहकार और शिक्षकों को अलग से भुगतान किया जाता है।जबकि शिक्षकों और किसान सलाहकारों पर पहले से ही ज्यादा वर्क लोड है।ऐसे में दोनों तरफ काम की गुणवत्ता प्रभावित होती है।वहीं ये सांख्यिकी कर्मी परीक्षा लेने के उपरांत प्रशिक्षित कर बहाल किये गए हैं।

बरहाल सवाल ये भी उठता है कि क्या किसी भी कल्याणकारी राज्य में किसी को काम रहते रोजगार मुक्त किया जा सकता है।सुशासन की सरकार से क्या गुहार लगा रहे हैं ये सांख्यिकी कर्मी आप भी पढ़ें :-

◆सुनिये मुख्य मंत्री/उपमुख्यमंत्री महोदय ज़िंदगी 4 दिन की है और आपकी कुर्सी भी।
विनम्र निवेदन है कि..
1.बिहार समग्र सांख्यिकी विकास के लिए योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा 2012 में जब  विज्ञापन निकला सरकार से जुड़ने की आशा स्वयंसेवक रूप में ही सही प्रबल हुई। मेरिट लिस्ट में नाम आने पर शिष्यों ने भी साधुवाद दिया और कहा कि नीतिश सरकार को उम्र पार लोगों की भी याद आई।

2.प्रशिक्षण प्राप्त किये फसल कटनी प्रयोग के तीन दिन,आधारित परीक्षा में फिट पाकर 3दिसम्बर 2012 को DSO से आदेश प्राप्त करके प्रखण्ड में योगदान दिये।

3.JSS, CI, कर्मचारी और अमीन की सहायता से अगहनी फसल कटनी प्रयोग खेत खलिहान में तराजू बटखरा बोरा लेकर किये। जिसका सैलरी बैंक अकाउंट से भुगतान किया गया। 

4.पहलीबार 4 और शेष चार बार में 10-10 प्रयोग रैंडम नम्बर से निकालकर नक्शा से उचित कोला चुनकर किया। 

5.एक बार आर्थिक [छठी] गणना करके बिहार का नाम पुरे देश में रौशन किया जिसका भुगतान प्रगणक मानदेय के रूप में बैंक अकाउंट से ही हुआ।

6.मान्यताप्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवक के दायित्व में उल्लेखित खेसरा पंजी का काम भी नक्शा हमें उपलब्ध करवाकर करवाया गया जिसका भुगतान अभी तक लम्बित है।

7.जिला स्तर पर चतुर्थ रोजगार-बेरोजगार गणना में करवाया जिसका भुगतान अन्वेषक के रूप में DSO ने चेक के माध्यम से किया। 

8.बीच में जन्म प्रमाण-पत्र प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में अभियान चलाकर मात्र 6 रु0 प्रति प्रमाण पत्र करवाया गया जो कि बड़ा ही दुरूह कार्य था। लेकिन अफसरों के आश्वाशन और अन्य विभाग में इस तरह के जॉब को स्थायी और नियमित करने तथा ASV को भी राजनेताओं के द्वारा भरोसा पाकर हमने अपना मूल काम छोड़कर पुरे जोश-लगन से ततपरता से सम्पन्न किया कि हम तो अन्य कहीं इस उम्र में फिट ही नही हो सकते तो इसी विभाग को जीविका का मूल साधन बनाने का निश्चय किया।

9.समाज और कुटुंब में भी ख़ुशी हुई साथ ही विभागीय कर्मी भी पुरे खुश और सहयोगपूर्ण रहे कि asv से उनका काम आसान और ससमय तथा त्रुटिहीन होने लगा।

10.सरकार हमारे स्थायित्व हेतु कमिटी गठित की बात कहकर हमसे काम लेना बन्द कर दिया। आंदोलन द्वारा विज्ञापित परिलब्धि की मांग की जाने लगी। कई सभाओं में CM ने हमारी समस्या का समाधान जल्दी और निश्चित होगा की घोषणा भी की। 

11.इधर हमलोंगों ने स्वयंसेवक के रूप में निर्धारित सर्वे काम को दूसरे द्वारा करवाये जाने पर DM, DSO, BDO और मंत्रियों विधायकों को ज्ञापन देता रहा और परिणास्वरूप अपनी जीविका और पंचायत में सेवा खोकर बिलकुल ही बेकार और परिवार पर बोझ सा होकर अपने आपको अर्ध-पागल सा महसूस करने लगा। कभी-कभी बड़ी दूर जाने की भी सोच हावी होने लगी।

12.तभी फिर आशा की नई किरण जगी कि सरकार ने सभी अस्थायी कर्मियों के लिए उच्च स्तरीय कमिटी गठित कर दी है। कुछ मानसिक शांति मिली अख़बार में asv का नाम देखकर। 

13.कमिटी का विस्तार दो बार किया गया। अभी उसका रिपोर्ट पंचायत चुनाव सम्पन्न होने के बाद आने की बात हुई ही थी कि A K चौधरी के रिपोर्ट आने से पहले न जाने किस दुर्भावना से ग्रसित होकर 7 जून 2016 को दिन के 11 बजे कैबिनेट बुलाकर ASV के पैनल को रद्द कर दिया गया। कारण बताया कि अब फसल कटनी और आर्थिक गणना का काम सम्पन्न हो गया है और सहकारिता विभाग के नियम में परिवर्तन होने के कारण साथ ही मुख्य सचिव महरोत्रा साहेब ने यह भी बताया कि asv से कोई शुल्क नही लिया गया है।

 14.महाशय, शिक्षको,टोला सेवको तालीम मरकज स्वयंसेवकों विकास मित्र आदि से भी कोई शुल्क नही लिया गया और उनकी सेवा स्थायी कर दी गयी हमारे आंदोलन के दरम्यान ही और तभी हमे आश्वासन भी दिया गया। सरकारी कर्मी का दर्जा पा चुके इन कर्मियों से नियोजन से पूर्व् कोई टेस्ट भी नहीं लिया गया था ।जबकि हमने प्रशिक्षणों प्रान्त परीक्षा दी थी और पहली दफा बिहार में मेरिट वाले 10000ही लगभग पास हुए थे फिर 80000 की आवश्यकता दिखाकर 2013 में परीक्षा का प्रारूप बदलकर 72890 asv का पैनल तैयार किया। लगभग 40000asv सांख्यिकी काम किये हैं उनका रिपोर्ट भी सरकार ने त्वरित आदेश से मंगवाया था जिससे भी हम आशान्वित हुए लेकिन अब हमे मूर्छित किया जा रहा है।

15.सर! हैरत की बात यह है कि सर्वे का काम अब भी चल रहा है जो बिना प्रशिक्षण पाये लोग कर रहें हैं।टोला स्वयंसेवक, तालीमी मरकज स्वयं,कहीं-कहीं तो शिक्षक भी। 

16.श्रीमान! हमारी व्यथा और जरूरी-मजबूरी को देखते हुए हमें हमारी सेवा नियमित करके हमे वापस काम पर लिया जाय क्योंकि काम किये हुए asv में अधिकतर नौकरी में जाने की उम्र सीमा पार कर चुके हैं लेकिन टैलेंटेड और करीबन गणित से हैं। हमारे काम की प्रशंसा देश में हुई और इसके तर्ज पर अन्य राज्यो में नियमित सांख्यिकी कर्मी बहाल की प्रक्रिया को अपनाया गया।

9 COMMENTS

  1. और अब हम लोग तो सिर्फ 13500 ही बचे है। जो केस किये है। इन्हें ही न्याय दे दीजिए CM साहब

  2. Sir jee aab kitna paresan karenge Modi yogi ko pura bihar jan gya is liye puri duniya me femas ho gya hi usi tarah nitish babu asv ko dhyan de or modi yogi nitish bane

  3. sir cm sahb hm lov bhukmari se jindgi jhel jhel ke ub gye hai ab bardast nahi hota hai pz phir se bhal kr digiye sir jis se ki hm logo ka v parivar khus rahe rahe

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