सारण के कोठियां-नारांव सूर्य मंदिर तलाब छठ महापर्व के लिए सजधज कर तैयार

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छपरा से चंद्र प्रकाश राज की स्पेशल रिपोर्ट

छपरा: सारण जिला के कोठिया-नरांव स्थित सूर्य मंदिर न सिर्फ जिला बल्कि उत्तर बिहार का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है ।यहा एक सांथ सूर्य मंदिर के अलावे राम जानकी मंदिर व शिवालय स्थित है।यद्यपि सूर्य मंदिर का इतिहास तो बहुत पूराणा नही है ।20 वी सदी के उतरार्ध मे सूर्य मंदिर का निर्माण सप्तर्षि श्री श्री 1008 श्री रामदासजी महाराज ने कराइ, लेकिन इस स्थल का इतिहास अति प्राचीन है। यह स्थल तपो भूमि के रूप मे विख्यात है।मनोकामना पूर्ण होते है ,भक्तो के इस मंदिर मे प्रत्येक वर्ष जिले व अन्य जिले के दर्जनो दूर दराज के छठ व्रती यहां व्रत करने आती है। जिनके मनोरथ पूर्ण होते है वो रातो भर घाट पर रहकर ही व्रत रखती है और सप्तमी के दिन उदयांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर घर लौटती है।
छठ पर्व के अवसर पर कार्तिक व चैत्र मे यहां मेला लगता है।आस पास के आधा दर्जन यथा कोठियां,नराव,मौजमपुर,मुसेपुर,डुमरी आदि पंचायतो के व्रती अपने परिवार के सांथ यहां आते है और सूर्य कुण्ड (पोखर) मे भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित कर सूर्य मंदिर मे भगवान सूर्य का दर्शन व पूजन कर कथा श्रवण करते है।

मंदिर स्थापना के बाद से यहां दिनो दिन महता बढती जा रही है ।छठ पूजा के दिन तो माने चहुं दिसाओ से जन सैलाब उमर परती है ।दर्जनो वाहनो की कतारे दूर दराज के छठ व्रतियो को लेकर मंदिर पर पहुंचती है। यद्यपि यह स्थल पावन स्थल के साथ- साथ पर्यटन का प्रसिद्ध केन्द्र भी है।इस मंदिर को गडखा अंचलाधिकारी दो दिन पहले निरीक्षण किये लेकिन व्रतियो की सुविधाओ की दृष्टि से कोई कार्य आरंभ नही कराये।तीन वर्ष पूर्व गडखा के अंचलाधिकारी अश्विनी कुमार चौबे ने सूर्य मंदिर परिसर को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने हेतु स्वयं प्रतिवेदन तैयार करके विडियो व फोटो उप विकास आयुक्त सारण को भेजा लेकिन वह भी अभीतक ठंढे बस्ते मे पड़ा है।

यह जिले व राज्य के लिए गौरवशाली स्थल है ।लेकिन सरकार व जिला प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण यह स्थल पर्यटन केन्द्र के रूप मे विकसित नही हो पा रहा है ।पिछले वर्ष जिलाधिकारी सारण व पुलिस कप्तान छठ पूजा के दो दिन पहले एक सांथ इस स्थल का निरीक्षण किए लेकिन उनके स्तर से भी अभी तक कोई सहयोग नही मिला ।हजारो दर्शनार्थी व छठ व्रतियो की समस्त जबाबदेही की जिम्मेवारी यहां के स्थानीय ग्रामीणो व मंदिर सेवा समिति के सदस्यो पर रहती है ।छठ के दिन जो माताये छठ घाट पर रात्री मे रूक कर व्रत रखती है।

उनके लिए भी जिला प्रशासन कोई व्यवस्था नही करती। ना ही रात्री मे उनकी सुरक्षा मे स्थानीय थाना को तैनात करती है ।यदि उन व्रतियो के सांथ किसी प्रकार की हादसा हो जाये तो इसकी जबाबदेही किसके माथ जडी जाएगी इस बात से स्थानीय लोग सदैव सशंकित रहते है और रात भर मंदिर पर बैठकर समय बीताते है। जिसकी चिन्ता सरकार व प्रशासन को नही रहती ।प्रशासन के तरफ से जलकुंड मे अधिक जल रहने पर मात्र दो एस डी आर एफ के जवानों को लगाया जाता है ।लेकिन वो भी आपदा से निपटने हेतु किसी परकार के अत्याधुनिक उपकरण के सांथ नही देखे जाते।

मंदिर मे राजस्व के कोई स्रोत नही होने के कारण चंदे के पैसे से घाटो की सफाई,कुण्ड मे जलभरी,लाईट,भोजन का प्रवंध ग्रमीण मिलकर करते है।मंदिर पर चोर लुफंगो की भी डर बनी रहती है ।बाउंड्री नही होने के कारण यहां चारो तरफ से रास्ते है मंदिर मे भी दो बार मुकुट,भगवान के आभूषण,वर्तन की चोरी हो चुकी है ।फिर भी प्रशासन के कान खरे नही हो पा रहे है।गांव के शंभुनाथ सिह,रमेश सिह,हेमंत सिह,अजय कुमार सिह,रामजी सिह,राकेश कुमार सिह,राजेश कुमार तिवारी,मनोज सिह,कुनाल सिह,ओम कृष्ण सिह उर्फ ठाकुर साहेब,गोपाल सिह,संतोष सिह,सत्येन्द्र सिह सुभाष यादव,जनक लाल साह,विनोद राय,डाक्टर सुभाष सिह,कुन्दन सिह,चन्देश्वर सिह आदि चन्दा एकत्र कर छठ घाट की सफाई व मंदिर तथा पक्के घाटो के बाउंड्री की रंगाई व मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर चला रहे है ।छठ के पूर्व दर्शनार्थी व छठ व्रतियो को कोई असुविधा न हो।

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